रतनपुर नगर पालिका के तालाबों पर आखिर किसका कब्जा? दो साल से आवंटन अटका, राजस्व को लाखों की चपत!
रतनपुर से संतोष सोनी चिट्टू
रतनपुर। नगर पालिका रतनपुर के तालाबों का मछुआरों को आवंटन नहीं होने का मामला अब सवालों के घेरे में है। लगभग दो वर्ष बीत जाने के बावजूद तालाबों का नियमित आवंटन नहीं हो सका है। जबकि नगर पालिका द्वारा आवेदन भी आमंत्रित किए गए थे। इसके बाद भी प्रक्रिया अधर में लटकी हुई है, जिससे मछुआरा समाज में नाराजगी बढ़ती जा रही है।
सूत्रों के अनुसार, नगर पालिका में यह नियम बनाया गया था कि जिन ठेकेदारों या आवेदकों पर बकाया राशि होगी, उन्हें एनओसी नहीं दी जाएगी और वे निविदा प्रक्रिया में शामिल नहीं हो सकेंगे। लेकिन आरोप है कि इस नियम का पालन नहीं किया गया और पूरी प्रक्रिया ही ठंडे बस्ते में डाल दी गई।
इस बीच, आरोप है कि आवंटन के बिना ही तालाबों से लगातार मछलियां निकाली जा रही हैं, जिससे नगर पालिका को राजस्व का भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। सवाल यह भी उठ रहा है कि जब तालाबों का वैधानिक आवंटन नहीं हुआ, तो आखिर मछली निकालने की अनुमति किसके इशारे पर दी जा रही है?
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय पर पारदर्शी तरीके से तालाबों का आवंटन किया जाता, तो नगर पालिका को लाखों रुपये का राजस्व प्राप्त होता। अब जनता पूछ रही है कि आखिर दो साल से आवंटन क्यों नहीं हुआ? इसके लिए जिम्मेदार कौन है?
जनता के सवाल
आवेदन आमंत्रित होने के बाद भी आवंटन क्यों नहीं हुआ?
बकायदारों को लेकर बनाए गए नियम का पालन क्यों नहीं किया गया?
बिना आवंटन के तालाबों से मछली कौन निकलवा रहा है?
नगर पालिका को हुए राजस्व नुकसान की भरपाई कौन करेगा?


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