हिंदू नव वर्ष पर रतनपुर में एकता की गूंज: महामाया चौक का भव्य कायाकल्प, निकली ऐतिहासिक शोभायात्रा, फिर भी शासन-प्रशासन की नहीं पड़ी नजर
रतनपुर से संतोष सोनी चिट्टू
रतनपुर। हिंदू नव वर्ष और चैत्र नवरात्रि के पावन अवसर पर रतनपुर में आस्था, उत्साह और जनएकता का ऐसा विराट स्वरूप देखने को मिला, जिसने हर किसी का मन मोह लिया। जहां एक ओर नगरवासी भक्ति में सराबोर नजर आए, वहीं दूसरी ओर हिंदू नव वर्ष समिति ने अपने अथक प्रयासों से वर्षों से उपेक्षित पड़े महामाया चौक को नया जीवन देकर इतिहास रच दिया।
हैरानी की बात यह रही कि इतने भव्य और सराहनीय कार्य के बावजूद शासन, प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की नजर तक इस ओर नहीं पड़ी।
नगर के हृदय स्थल महामाया चौक, जो वर्षों से वीरानी और उपेक्षा का शिकार बना हुआ था, आज भव्यता और सौंदर्य का प्रतीक बनकर उभरा है। समिति के समर्पित युवाओं और नागरिकों ने बिना किसी शासकीय सहायता के इस चौक को साज-सज्जा, रंग-रोगन और आकर्षक डिजाइन से इस तरह संवारा कि हर राहगीर ठहरकर निहारने को मजबूर हो गया।
चौक में स्थापित मां महामाया का भव्य, जीवंत और मनमोहक चित्र श्रद्धालुओं के लिए आस्था का केंद्र बन गया है, जहां लोग श्रद्धा से शीश नवाते नजर आए।
हिंदू नव वर्ष के शुभ अवसर पर इस नवसज्जित चौक का विधिवत उद्घाटन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में नगरवासी, श्रद्धालु और समिति के सदस्य शामिल हुए। उद्घाटन के साथ ही पूरे नगर में एक भव्य और ऐतिहासिक शोभायात्रा निकाली गई, जिसने रतनपुर की फिजाओं को पूरी तरह भक्तिमय बना दिया।
शोभायात्रा में पारंपरिक वेशभूषा में सजे युवक-युवतियां, आकर्षक और संदेशात्मक झांकियां, गूंजते ढोल-नगाड़े, भगवा ध्वजों की लहराती कतारें और गगनभेदी जयकारों ने पूरे माहौल को उत्साह और भक्ति से भर दिया। नगर के प्रमुख मार्गों से गुजरती इस शोभायात्रा का जगह-जगह पुष्पवर्षा कर भव्य स्वागत किया गया। ऐसा लग रहा था मानो पूरा रतनपुर एक साथ आस्था के रंग में रंग गया हो।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि जहां एक ओर शासन और प्रशासन विकास के बड़े-बड़े दावे करते हैं, वहीं दूसरी ओर समाज ने अपनी एकजुटता और इच्छाशक्ति से वह कर दिखाया, जो वर्षों से अधूरा पड़ा था। लोगों ने यह भी कहा कि इतने भव्य आयोजन और जनहित के कार्य के बावजूद जिम्मेदार जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की अनुपस्थिति कई सवाल खड़े करती है।
हिंदू नव वर्ष समिति का यह प्रयास केवल एक चौक के सौंदर्यीकरण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सामाजिक एकता, सांस्कृतिक चेतना और जनशक्ति का जीवंत उदाहरण बन गया है। यह पहल यह स्पष्ट संदेश देती है कि जब समाज ठान ले, तो बिना किसी सरकारी सहयोग के भी बदलाव की नई इबारत लिखी जा सकती है।
रतनपुर में हुए इस आयोजन ने न केवल नगर की खूबसूरती बढ़ाई है, बल्कि लोगों के दिलों में एक नई ऊर्जा और गर्व की भावना भी भर दी है। अब महामाया चौक केवल एक स्थान नहीं, बल्कि आस्था, एकता और जनसंकल्प का प्रतीक बन चुका है।
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