“पूना मारगेम – पुनर्वास से पुनर्जीवन” पहल से 25 माओवादी मुख्यधारा में लौटे
रतनपुर से संतोष सोनी चिट्टू
रतनपुर।जिला बीजापुर | 31 मार्च 2026, मंगलवार
वामपंथी उग्रवाद के खिलाफ चल रहे अभियान में एक बड़ी सफलता हासिल करते हुए “पूना मारगेम – पुनर्वास से पुनर्जीवन” पहल के तहत दण्डकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी (DKSZC) से जुड़े 25 माओवादी कैडरों (12 महिला सहित) ने हिंसा का रास्ता छोड़कर समाज की मुख्यधारा में वापसी की है। यह मिशन 2026 के तहत उग्रवाद के उन्मूलन की दिशा में एक निर्णायक कदम माना जा रहा है।
1.47 करोड़ के इनामी माओवादी, एक साथ सरेंडर
आत्मसमर्पण करने वाले सभी 25 कैडरों पर कुल 1.47 करोड़ रुपये का इनाम घोषित था। इनमें संगठन के विभिन्न स्तरों के पदाधिकारी शामिल हैं—
CyPC: 02
DVCM: 01
बटालियन/कंपनी सदस्य: 07
PPCM: 04
ACM: 06
अन्य सदस्य: 05
इस सामूहिक आत्मसमर्पण को नक्सल विरोधी अभियान की महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।
इतिहास की सबसे बड़ी बरामदगी
इस कार्रवाई में सुरक्षा बलों को अब तक की सबसे बड़ी सफलता मिली है—
₹14.06 करोड़ की कुल बरामदगी
₹2.90 करोड़ नकद
₹11.16 करोड़ मूल्य का 7.20 किलोग्राम सोना
अब तक (जनवरी 2024 से मार्च 2026) कुल बरामदगी:
₹19.43 करोड़
₹6.63 करोड़ नकद
₹12.80 करोड़ मूल्य का 8.20 किग्रा सोना
93 घातक हथियार जब्त
सुरक्षा बलों ने माओवादियों से भारी मात्रा में हथियार भी बरामद किए—
AK-47: 04
SLR: 09
INSAS LMG: 01
INSAS राइफल: 07
.303 राइफल: 12
BGL लॉन्चर: 23
अन्य हथियार सहित कुल 93 हथियार
वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में कार्यक्रम
यह आत्मसमर्पण कार्यक्रम पुलिस महानिरीक्षक बस्तर रेंज सुन्दरराज पी,
उप महानिरीक्षक CRPF बी एस नेगी
और पुलिस अधीक्षक डॉ जितेन्द्र कुमार यादव सहित प्रशासन एवं सुरक्षा बलों के वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में संपन्न हुआ।
“हिंसा से विकास की ओर” – बदलती सोच
आत्मसमर्पण करने वाले प्रमुख माओवादी नेताओं—
मंगल कोरसा उर्फ मोटू
आकाश उर्फ फागु उईका
शंकर मुचाकी
पाले कुरसम
ने संगठन की औचित्यहीनता को स्वीकार करते हुए शांतिपूर्ण जीवन अपनाने का निर्णय लिया।
1000 से ज्यादा माओवादी लौटे मुख्यधारा में
बीजापुर जिले में 1 जनवरी 2024 से 31 मार्च 2026 तक—
कुल 1003 माओवादी कैडर पुनर्वास के जरिए मुख्यधारा में लौट चुके हैं।
सरकार की पुनर्वास नीति का असर
आत्मसमर्पण करने वाले कैडरों को शासन की नीति के तहत—
आर्थिक सहायता
कौशल विकास प्रशिक्षण
आवास
शिक्षा एवं रोजगार
जैसी सुविधाएं दी जाएंगी, जिससे वे सम्मानजनक जीवन जी सकें।
शेष माओवादियों से अपील
पुलिस और सुरक्षा बलों ने अपील की है कि—
“हिंसा छोड़ें, हथियार त्यागें और मुख्यधारा में लौटें। सरकार उनके सुरक्षित और उज्ज्वल भविष्य के लिए प्रतिबद्ध है।”
सुरक्षा बलों की बड़ी भूमिका
इस सफलता में DRG, STF, CRPF, कोबरा और जिला बल की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। लगातार ऑपरेशन, विश्वास निर्माण और संवेदनशील व्यवहार से माओवादियों को आत्मसमर्पण के लिए प्रेरित किया गया।
निष्कर्ष:
बीजापुर में हुआ यह सामूहिक आत्मसमर्पण न केवल नक्सलवाद के खिलाफ बड़ी सफलता है, बल्कि बस्तर क्षेत्र में शांति, विकास और विश्वास की नई उम्मीद भी जगाता
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