शिक्षा का मंदिर या बाल श्रम केंद्र?शासकीय स्कूल में नन्हे बच्चों से झाड़ू–कचरा उठवाने का वीडियो वायरल, मचा बवाल


शिक्षा का मंदिर या बाल श्रम केंद्र?
शासकीय स्कूल में नन्हे बच्चों से झाड़ू–कचरा उठवाने का वीडियो वायरल, मचा बवाल

रतनपुर।बिलासपुर जिले के कोटा विकासखंड अंतर्गत बानाबेल संकुल की शासकीय प्राथमिक शाला पंडरा पथरा से सामने आया वीडियो न सिर्फ शिक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है, बल्कि बाल अधिकारों की खुलेआम धज्जियां उड़ाने का प्रमाण भी बन गया है।
वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि सुबह 11:15 बजे, जब बच्चों को पढ़ाई में होना चाहिए था, उस वक्त 5 मासूम बच्चों से स्कूल परिसर का कचरा बाल्टी में भरवाकर बाहर फिंकवाया जा रहा है, वहीं 2 बच्चों से कक्षा कक्ष में झाड़ू लगवाई जा रही है।
यह सब कुछ शिक्षकों की मौजूदगी में कराया जा रहा था।
 नियम साफ हैं — शासकीय स्कूलों में बच्चों से किसी भी प्रकार का श्रम कार्य पूर्णतः प्रतिबंधित है।
इसके बावजूद सवाल यह है कि
 क्या शिक्षकों को नियमों की जानकारी नहीं?
 या जानबूझकर बच्चों को मजदूर समझ लिया गया?
शिक्षा का मंदिर अब सफाई अभियान का मैदान बनता जा रहा है, जहां किताबें हाथ में देने की बजाय बच्चों को झाड़ू–बाल्टी थमा दी जा रही है।
इस पूरी घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होते ही शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया है। अभिभावकों और ग्रामीणों में जबरदस्त आक्रोश है। लोगों का कहना है कि
“अगर यही पढ़ाई है, तो फिर स्कूल और मजदूरी में फर्क क्या रह गया?”
सबसे बड़ा सवाल अब यह है—
क्या जिम्मेदार शिक्षकों पर सख्त कार्रवाई होगी?
 या मामला भी बाकी मामलों की तरह फाइलों में दफन कर दिया जाएगा?
यदि इस मामले में कार्रवाई नहीं हुई, तो यह पूरे शिक्षा तंत्र की विफलता मानी जाएगी।
अब निगाहें टिकी हैं शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन पर—
 क्या दोषियों पर गाज गिरेगी?
 या वायरल वीडियो भी कुछ दिनों में भुला दिया जाएगा?

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