भूमि नाम विलोपन मामले में बड़ा कदम पीड़ित ने जिला कलेक्टर को सौंपा आवेदन उप मुख्यमंत्री अरुण साव को भी दी गई लिखित शिकायत

भूमि नाम विलोपन मामले में बड़ा कदम
पीड़ित ने जिला कलेक्टर को सौंपा आवेदन
उप मुख्यमंत्री अरुण साव को भी दी गई लिखित शिकायत

रतनपुर | बिलासपुर (छत्तीसगढ़)
रतनपुर तहसील क्षेत्र में राजस्व अभिलेखों से नाम विलोपित कर भूमि हड़पने के गंभीर आरोपों वाले मामले में अब प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई की मांग तेज हो गई है। पीड़ित पक्ष ने न केवल रतनपुर थाने में शिकायत दर्ज कराई है, बल्कि अब जिला कलेक्टर बिलासपुर को लिखित आवेदन सौंपते हुए न्याय की गुहार लगाई है।
इतना ही नहीं, मामले की गंभीरता को देखते हुए छत्तीसगढ़ के उप मुख्यमंत्री एवं राजस्व मंत्री अरुण साव को भी आवेदन देकर पूरे प्रकरण से अवगत कराया गया है।
मृतक की भूमि से नाम हटाने का आरोप
मामला स्वर्गीय मोतीचंद जायसवाल पिता कपिलनाथ जायसवाल से जुड़ा है। आरोप है कि उनकी मृत्यु के बाद यह कहकर कि उनके कोई विधिक वारिस नहीं हैं, षड्यंत्रपूर्वक राजस्व रिकॉर्ड में हेरफेर कर उनका नाम विलोपित कर दिया गया, जिससे उनकी वैध भूमि पर कब्जे का प्रयास किया जा सके।
संयुक्त भूमि में आधे हिस्से का था वैध हक
प्राप्त जानकारी के अनुसार ग्राम रतनपुर स्थित खसरा नंबर 3604/3 की कुल 52 डिसमिल भूमि राजस्व अभिलेखों में संयुक्त रूप से दर्ज थी। इसमें स्व. मोतीचंद जायसवाल के साथ विकल जायसवाल, विवेक जायसवाल एवं विनीत जायसवाल के नाम दर्ज थे। पीड़ित पक्ष का कहना है कि भूमि के आधे हिस्से पर स्व. मोतीचंद जायसवाल का पूर्ण वैधानिक अधिकार था, जिसे नियमों की अनदेखी कर समाप्त किया गया।
तहसीलदार समेत तीन पर गंभीर आरोप
शिकायत में तहसीलदार शिल्पा भगत, लिपिक उषा कवर और हल्का पटवारी दिलीप परस्ते की भूमिका को संदिग्ध बताते हुए आरोप लगाया गया है कि आपसी सांठ-गांठ और कूट रचना के जरिए राजस्व दस्तावेजों में बदलाव कराया गया।
कलेक्टर से जांच, उप मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप की मांग
जिला कलेक्टर को दिए गए आवेदन में मांग की गई है कि—
✔ राजस्व रिकॉर्ड में किए गए सभी बदलावों पर तत्काल रोक लगे
✔ पूरे प्रकरण की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कराई जाए
✔ दोषी अधिकारियों एवं कर्मचारियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई हो
✔ पीड़ित पक्ष को शीघ्र न्याय एवं राहत प्रदान की जाए
वहीं उप मुख्यमंत्री अरुण साव को सौंपे गए आवेदन में राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए सीधे हस्तक्षेप की मांग की गई है।
अब प्रशासन और सरकार की अग्निपरीक्षा
अब यह मामला केवल तहसील या थाने तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि जिला प्रशासन और राज्य सरकार के संज्ञान में पहुंच चुका है।
 सवाल यह है कि क्या पीड़ित को न्याय मिलेगा?
 क्या जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई होगी?
फिलहाल पूरे क्षेत्र की निगाहें कलेक्टर कार्यालय और उप मुख्यमंत्री के निर्णय पर टिकी हुई हैं।

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