रतनपुर से संतोष सोनी चिट्टू
रतनपुर/कोटा। ग्राम पंचायत अमाली में प्रस्तावित कोल वाशरी परियोजना के खिलाफ क्षेत्र में जनाक्रोश तेजी से बढ़ता जा रहा है। पर्यावरण, जल स्रोतों और कृषि भूमि पर संभावित खतरे को लेकर ग्रामीण अब खुलकर विरोध में उतर आए हैं। क्षेत्र के गांवों में लगातार बैठकें हो रही हैं और बड़ी संख्या में लोग आंदोलन की तैयारी में जुट गए हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि कोल वाशरी शुरू होने से इलाके में प्रदूषण का स्तर बढ़ेगा, जल स्रोत दूषित हो सकते हैं और खेती-किसानी पर भी गंभीर असर पड़ेगा। यही वजह है कि अब लोग अपनी जमीन, जंगल और प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा के लिए एकजुट होकर संघर्ष का बिगुल फूंक चुके हैं।
18 जून को जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर ग्रामीण अपनी आपत्ति दर्ज कराएंगे, वहीं 19 जून को प्रस्तावित जनसुनवाई का बहिष्कार करते हुए विशाल विरोध प्रदर्शन किया जाएगा। आंदोलन को लेकर आसपास के गांवों में भी व्यापक समर्थन देखने को मिल रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि यह केवल एक परियोजना का विरोध नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को बचाने की लड़ाई है। उनका आरोप है कि विकास के नाम पर पर्यावरण और ग्रामीण जीवन को खतरे में डालने वाली योजनाओं को किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा।
क्षेत्र में बढ़ते विरोध के बीच अब सभी की निगाहें प्रशासन और कंपनी के अगले कदम पर टिकी हैं। यदि ग्रामीणों की मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो आंदोलन और उग्र होने के संकेत भी मिल रहे हैं।
नारा गूंज रहा है — "जल, जंगल, जमीन हमारी है, नहीं चलेगी कोल वाशरी!"
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